गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को
बताये कि जो दान ऐसे व्यक्ति को, जिससे किसी प्रतिफल की आशा नहीं है, इस भावना से दिया जाता है कि दान देना
हमारा कर्तव्य है, और जो उचित स्थान में,उचित समय पर और योग्य व्यक्ति को दिया जाता
है, वह दान सात्विक दान माना जाता है ।
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