भगवद्गीता
सोमवार, 25 सितंबर 2017
राजसिक दान
गुरु योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुनको बताये कि परंतु जो दान किसी प्रतिफल की आशा से या भविष्य में किसी लाभ की आशा से किया जाता है
,
और जिस दान को देने में क्लेश होता है
,
उसे राजसिक दान माना जाता है ।
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