भगवद्गीता
मंगलवार, 5 सितंबर 2017
श्रद्धा से युक्त
अर्जुन गुरू के समक्ष जिज्ञासा व्यक्त करते हुये कहा कि हे कृष्ण
,
जो लोग शास्त्रों के विधानो की परवाह न करते हुये श्रद्धा से युक्त होकर यज्ञ करते हैं
,
उनकी क्या स्थिति होती है
?
उनकी श्रद्धा सात्विक होती है या राजसिक या तामसिक
?
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