भगवद्गीता
रविवार, 1 मई 2016
दैवीय प्रकृति
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से कहे कि हे अर्जुन वे लोग जो कि आत्मचेतना का जीवन जीते हैं और मुझे सभी जीव रूपों का अक्षर आधार जान कर अविचलित मस्तिष्क से सतत् मेरी आराधना करते हैं वे पुण्य आत्मा हैं ।
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