सोमवार, 11 जुलाई 2016

ब्रम्ह की ज्वाला

ब्रम्ह के चेतना की ज्वाला जब आत्मा में व्याप्त हो जाती है तभी व्यक्ति के अहंकार का आच्छादन क्षीण होता है । बिना ब्रम्ह को समर्पित हुये इस प्रकृतीय मोंह से मुक्ति का पथ सम्भव नहीं होता है । ब्रम्ह जब सहायक होता है तभी मुक्ति मिलती है क्योंकि मोंह की जडे अति प्राचीन होती हैं । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें