समस्त जीवन में गुज़रते हुये स्थल, जीवन के विभिन्न भागो के बदलते हुये मनोवेग, समस्त मानवता के इतिहास को एक नदी के पुल
के रूप में देखा जा सकता है । इनसे व्यक्ति गुज़रे परंतु गुरू का उपदेश बताता है कि
इसके निवासी बनने की चेष्टा मत करिये । यह समस्त रूप संसार मात्र ब्रम्ह की क्षवि
है परंतु सत्य नहीं है ।
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