शुक्रवार, 22 जुलाई 2016

संसार एक पुल

समस्त जीवन में गुज़रते हुये स्थल, जीवन के विभिन्न भागो के बदलते हुये मनोवेग, समस्त मानवता के इतिहास को एक नदी के पुल के रूप में देखा जा सकता है । इनसे व्यक्ति गुज़रे परंतु गुरू का उपदेश बताता है कि इसके निवासी बनने की चेष्टा मत करिये । यह समस्त रूप संसार मात्र ब्रम्ह की क्षवि है परंतु सत्य नहीं है । 

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