शनिवार, 23 जुलाई 2016

परम् सत्य की शरण

ब्रम्ह की निम्नतर प्रकृति और उच्चतर प्रकृति की परस्पर क्रिया एवं प्रतिक्रिया का स्थल यह रूप संसार है । उच्चतर प्रकृति निरंतर निम्नतर प्रकृति के मोंह में आसक्त है । फलत: यह त्रास भोग का जीवन मृत्यु का चक्र निरंतर चलता ही जा रहा है । मोंह का अज्ञान इस चक्र को गतिमान किये ही रहेगा । इस मोंह से मुक्ति का पथ ब्रम्ह की शरण ही है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें