मंगलवार, 26 जुलाई 2016

अहंकार से मुक्ति

गुरू ने जिज्ञासु अर्जुन को अहंकार की कैद से मुक्त होकर उस अनंत सत्ता की व्यापकता में विलीन होकर उस चिर दिव्य शांति की दशा के आनंद भोग करने का उपदेश बता कर उसे प्रयत्नशील होने को प्रेरित करते हैं । गुरू उसे सुझाते हैं कि अपनी समस्त शक्ति एवं हृदय में उपलब्ध प्यार को उसे अर्पित कर दो और उसे पाना ही अपना सर्वोच्च लक्ष्य निर्धारित कर उसका ही ध्यान उसका ही सतत् जप करने से तुम निश्चय ही उसके साथ एकीकृत हो जावोगे ।

इसप्रकार सर्वोच्च ज्ञान एवं सर्वोच्च रहस्य नामक नौवां अध्याय पूर्ण हुआ }

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