गुरू ने ब्रम्ह की उच्चतर प्रकृति आत्मा की प्रत्येक व्यक्ति
में एक समान उपस्थिति को इंगित करते हुये कहाकि मैं प्रत्येक व्यक्ति में एक समान
हूँ । आत्मा की प्रधानता का जीवन प्राप्त करने के जिज्ञासु को इसी सत्य की अनुभूति
करने की आवश्यकता होती है । प्रश्नगत इस आत्मा की अनुभूति होती है ना कि इसकी
उपस्थिति होती है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें