भगवद्गीता
सोमवार, 4 जुलाई 2016
ब्रम्हत्व एक रस
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से बताये कि मैं सभी व्यक्तियों में एक समान हूँ
,
मुझे कोई भी प्रिय अथवा अप्रिय नही है
,
परंतु जो भी व्यक्ति मुझे श्रद्धापूर्वक पूजता है वह मुझमें निवास करता है और मैं उसमें निवास करता हूँ ।
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