शनिवार, 2 जुलाई 2016

बंधनकारी कर्मफल

गुरू ने बताया कि बंधन कर्म के फल द्वारा सृजित होता है । इच्छा जनित कर्म किसी विशिष्ट फल की प्राप्ति की कामना से किया जाता है इसलिये बंधनकारी होता है । इसके विपरीत ब्रम्ह की सेवा में अर्पित कर्म होता है । हम कर्म को ब्रम्ह की सेवा में कर रहे हैं । यह सन्यासी का कर्म है । मुक्तिदायक होता है । 

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