भगवद्गीता
बुधवार, 27 जुलाई 2016
अन्तर्भुति
इस रूप संसार के समस्त ज्ञात रूप में ब्रम्ह की क्षवि विद्यमान है । यह सत्य अकाट्य है । किसी भी रूप का अस्तित्व ब्रम्ह की क्षवि के उपस्तिति से ही सम्भव हुआ है । उस रूप की स्थिरता उस ब्रम्ह की क्षवि के विद्यमान रहने पर्यंत ही है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें