भगवद्गीता
गुरुवार, 28 जुलाई 2016
श्रेष्ठतम
इस रूप संसार की समस्त रूपों की रचना में विद्यमान ब्रम्ह ही श्रेष्ठतम है । ब्रम्ह की श्रेष्ठता अद्वितीय है । इसलिये इसकी तुलना किसी अन्य से सम्भव नहीं है । इस श्रेष्ठतम को जानने वाला सदैव आनंदित रहता है ।
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