गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन की
जिज्ञासा की पूर्ति करते हुये चिदानंद ब्रम्ह के साथ युक्त होना और ब्रम्हस्वरूप
पुरुषोत्तम अवतारी पुरुष के साथ युक्त होना की तुलनात्मक स्थिति को बताते हुये
जिज्ञासु अर्जुन से कहे कि लेकिन जो व्यक्ति, अक्षर, अ-परिभाष्य, अ-रूपधारी, सर्वव्यापी, अ-चिंतनीय, अ-परिवर्तनीय, अ-चल, स्थिर – क्रमश: चरण 3
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें