धृतराष्ट्र को कुरुक्षेत्र का
वृतांत बताते हुये संजय कहता है कि हे राजन इस प्रकार अर्जुन को श्रीकृष्ण ने अपने
विशाल दिव्यरूप का दर्शन कराने के उपरांत अर्जुन के आग्रह पर अपने को अपने सामान्य
स्वरूप में स्थापित करके अर्जुन को उत्पन्न हुये भय से मुक्त किया है ।
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