मंगलवार, 28 मार्च 2017

निराकार साकार

ब्रम्ह का स्वरूप बताया गया है “सत चित आनंद” । जागृत चेतना का मनुष्य “अवतारी पुरुष” । ज्ञान का जिज्ञासु क्या पाने को प्रयत्न करे ? आनंद को प्राप्त व्यक्ति प्रत्येक भाँति आनंद स्वरूप है । वह आँख के सामने है । उसके कृत उसके विचार सभी कुछ सुलभ है । ब्रम्ह संसार से बिलकुल अलग असम्बद्ध अस्तित्व है । जिज्ञासु अर्जुन की जिज्ञासा प्रत्येक भाँति व्यवहारिक है ।

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