ब्रम्ह का स्वरूप बताया गया है “सत
चित आनंद” । जागृत चेतना का मनुष्य “अवतारी पुरुष” । ज्ञान का जिज्ञासु क्या पाने
को प्रयत्न करे ? आनंद को प्राप्त व्यक्ति प्रत्येक
भाँति आनंद स्वरूप है । वह आँख के सामने है । उसके कृत उसके विचार सभी कुछ सुलभ है
। ब्रम्ह संसार से बिलकुल अलग असम्बद्ध अस्तित्व है । जिज्ञासु अर्जुन की जिज्ञासा
प्रत्येक भाँति व्यवहारिक है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें