भगवद्गीता
शनिवार, 18 मार्च 2017
सामान्य स्वरूप
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अपने मौलिक स्वरूप को ग्रहण करते हुये अर्जुन से कहते हैं कि मेरे दिव्य विराट रूपके दर्शनसे ना ही भयभीत होइये और नाही भ्रमित होइये अपने हृदय में नाही भय करिये और नाही हर्ष करिये और मेरे मौलिक स्वरूप का दर्शन कीजिये ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें