गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से
कहे कि इस संसार का कोई भी व्यक्ति वेदों के ज्ञानके पथ से अथवा बलिदान के पथ से
अथवा कर्मकाण्डों के धर्मविधान के पथसे प्रयत्न करते हुये आज़ तक इस कालातीत रूप का
दर्शन नहीं कर सका था जिसका कि दर्शन मैंने अनुग्रह पूर्वक तुम्हे कराया है ।
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