बुधवार, 22 मार्च 2017

देवदुर्लभ

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन से कहे कि इस संसार का कोई भी व्यक्ति वेदों के ज्ञानके पथ से अथवा बलिदान के पथ से अथवा कर्मकाण्डों के धर्मविधान के पथसे प्रयत्न करते हुये आज़ तक इस कालातीत रूप का दर्शन नहीं कर सका था जिसका कि दर्शन मैंने अनुग्रह पूर्वक तुम्हे कराया है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें