अर्जुन गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण की
महिमा गायन करते हुये आगे कहता है कि हे प्रभु आप इस संसार के समस्त चल और अचल
रूपों के पिता हैं प्रभु आप समस्त ऋषि मुनियों की तपस्या का अंतिम लक्ष्य ज्ञेय
सत्य हैं हे प्रभु आप समस्त संसार के उपदेशक गुरू हैं हे प्रभु आपके अतुलनीय बल और
ऐश्वर्य की समानता कोई अन्य नहीं कर सकता है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें