अर्जुन गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण की
महिमा गायन करते हुये आगे कहता है कि हे आराध्य देव मैं आपके ऐश्वर्य के सम्मुख
साष्टांग प्रणति करते हुये विनय करता हूँ कि प्रभु मुझे अपना पुत्र मानकर, प्रिय मानकर, सखा मानकर हमारी धृष्ठता के लिये क्षमा करने की कृपा करें ।
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