भगवद्गीता
गुरुवार, 23 मार्च 2017
अखण्ड भक्ति
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुनसे बताये कि हे शत्रुओं के हंन्ता (अर्जुन) अखण्ड अनन्य भक्ति द्वारा मेरे इस दिव्यरूप को जाना जा सकता है
,
सत्य दर्शन किया जा सकता है और मेरे इस स्वरूप में समाहित हुआ जा सकता है ।
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