संजय धृतराष्ट्र को युद्ध क्षेत्र
की स्थिति का चित्रण व्यक्त करते हुये कह्ता है कि अर्जुन केशव (श्रीकृष्ण) से
शत्रु से युद्ध करने की बात को सुनकर अपने दोनो हाँथो को प्रणाम की मुद्रा में
जोडे हुये भय से अवसन्न दशा में काँपती और लडखडाती हुई आवाज़ में बोलता है ।
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