सोमवार, 20 मार्च 2017

संकलित

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन के आग्रह को अनुग्रह पूर्वक स्वीकार कर अपने सहज प्रतिभासित मनुष्य स्वरूप में वापस स्थापित किये जाने पर अर्जुन अपने अंत:करण के उद्गार को व्यक्त करते हुये कहा कि हे जनार्दन (श्रीकृष्ण) आपके प्रतिभावान मनुष्य स्वरूप को देखकर अब मेरा मस्तिष्क संकलित हो सका है और मैं अपने सहज स्वभाव को प्राप्त कर सका हूँ ।   

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