सोमवार, 17 अगस्त 2015

सन्यास : चरण 2

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण ज्ञान के जिज्ञासु के लिये प्रयत्न के चरण 2 के रूप में बताते हैं कि जब जिज्ञासु इंद्रीय वासना वस्तुओं के प्रति मोंह से मुक्त होकर इस मानसिक स्थिति में पहुँच जाता है कि उसे अपनी इच्छा पूर्ति के लिये कोई कर्म करने की जिज्ञासा अथवा आवश्यकता नहीं रह जाता है तब वह योग की स्थिति प्राप्त कर लेता है ।

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