गुरुवार, 13 अगस्त 2015

अनुशासित कर्म

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो व्यक्ति अनुशासित रह कर कर्म करता है वही योगी बन सकता है और योगी होने के लिये सन्यास अर्थात् कर्म के फल से अनासक्त होना अनिवार्य दशा है ।

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