गुरू
योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो व्यक्ति अपनी आत्मा की अनुभूति में
आनंदित रहता है, अपनी आत्मा की अनुभूति से हर्षित होता है,
जिसे अपनी आत्मा में ब्रम्ह के प्रकाश की अनुभूति होती है वह योगी ब्रम्ह स्वरूप
हो जाता है । व्याख्याकार गुरू के उपरोक्त कथन का विस्तार बताते हुये कहता है कि
आत्मा की अनुभूति ब्रम्ह का दर्शन कराती है, ब्रम्ह की दिव्य शांति की अनुभूति होती
है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें