बुधवार, 5 अगस्त 2015

आत्मबोध

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो व्यक्ति अपनी आत्मा की अनुभूति में आनंदित रहता है, अपनी आत्मा की अनुभूति से हर्षित होता है, जिसे अपनी आत्मा में ब्रम्ह के प्रकाश की अनुभूति होती है वह योगी ब्रम्ह स्वरूप हो जाता है । व्याख्याकार गुरू के उपरोक्त कथन का विस्तार बताते हुये कहता है कि आत्मा की अनुभूति ब्रम्ह का दर्शन कराती है, ब्रम्ह की दिव्य शांति की अनुभूति होती है । 

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