गुरुवार, 27 अगस्त 2015

ब्रम्ह चेतना

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण आत्मा के सम्बंध में आगे बताये कि जिस व्यक्ति ने आत्मा के ब्रम्ह स्वरूप को जानकर उसे प्रकृतीय मोंह से मुक्त कर लिया है उसके लिये उसकी आत्मा मित्रवत् आचरण करती है परंतु जिस व्यक्ति की आत्मा अपने में ब्रम्ह स्वरूप की चेतना से अचेत है फलत: मोंह और अप्रिय में लिप्त है उसकी आत्मा उसके लिये शत्रु के समान आचरण करती है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें