योग शब्द का अर्थ होता है युक्त होना । परम् ब्रम्ह के साथ
युक्त होना लक्ष्य होता है । ब्रम्ह की उच्चतर प्रकृति आत्मा हम प्रत्येक के अंदर विद्यमान
होती है । परंतु यह आत्मा मोंह और अरुचि धारण करके त्रुटिपूर्ण हो जाती है }
योग द्वारा इस त्रुटिपूर्ण आत्मा को मोंह और अरुचि से मुक्त कराकर उसके मौलिक
ब्रम्ह स्वरूप में वापस पहुँचाना है । योगावस्था में कार्य का अभ्यास पथ है ।
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