रविवार, 2 अगस्त 2015

आत्मसुख

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जिस व्यक्ति की आत्मा प्रकृतीय रूपों में आसक्ति से परे रहती है वह व्यक्ति अपनी आत्मा में निहित सुख का अनुभव करता है । ऐसा व्यक्ति ही आत्मा का सुख अनुभव करते हुये ब्रम्ह की अनुभूति करने में सफल होता है । 

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