संकल्प
का उद्गम अहंकार से होता है । जब व्यक्ति अपने को परम् ब्रम्ह से भिन्न एक
अस्तित्व के रूप मानता है तब ही उसके मस्तिष्क में कुछ पाने का और उस पाने के लिये
यत्न के रूप में कुछ करने का संकल्प सृजित होता है । संकल्प की पूर्ति में किया
जाने वाला कर्म बंधनकारी होगा ।
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