गुरू
योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि जो व्यक्ति इस जीवन के रहते इच्छा और क्रोध
पर अंकुश करने में सफल हो जाता है वह ही सुखी इंसान है । व्याख्याकार कहता है कि
प्रकृतीयमोंह से मुक्ति प्रशस्थ करती है शांति – स्वतंत्रता – हर्ष । इसके विपरीत
मोंह जन्म देता है इच्छा को । इच्छा की पूर्ति ना होने पर क्रोध उत्पन्न होता है ।
इसीलिये गुरू ने साराँश बात कही कि जो व्यक्ति इच्छा और क्रोध पर विजय करने में
सफल होगा उसकी उपलब्धि होगी शांति – स्वतंत्रता – हर्ष ।
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