भगवद्गीता
शनिवार, 8 अगस्त 2015
आदर्श स्थिति
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताये कि ऐसे व्यक्ति जिनकी पवित्र आत्मा इच्छा और क्रोध से नुक्त हो गई हैं और जिनका मस्तिष्क नियंत्रित कार्य करता है और जिन्हे अपनी आत्मा का बोध हो गया है दिव्य ब्रम्ह की शांति का अनुभव करते हैं ।
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