मंगलवार, 25 अगस्त 2015

बाधा की व्याख्या

गुरू द्वारा बताये गये आत्मा का स्वरूप बोध, हम सभी के लिये बाधित अवस्था में होता है । इस बाधा का विस्तार व्याख्याकार बताता है कि हम सभी की सकल व्यस्तता मोंह और अप्रिय में सीमित है । कंचिद हम अपने मस्तिष्क पर छाये मोंह और अप्रिय के भ्रामक आवरण को हटा सकें तो हम अपने अंदर विद्यमान ब्रम्ह के अंश आत्मा का अनुभव कर सकेंगे । हमारी आत्मा जब तक इस मोंह और अप्रिय के मध्य रहती है वह अपने ही स्वरूप से अनभिज्ञ रहती है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें