शनिवार, 22 अगस्त 2015

सन्यास का उदय

हम जिस ब्रम्ह का अनुभव पाने के लिये सचेष्ट हैं उस ब्रम्ह के प्रयोजन में बिना किसी त्रुटि के सम्मलित होने का लक्ष्य मस्तिष्क में स्थापित कर अग्रसर होने पर यह अनिवार्य वाँक्षना बन जाती है कि स्व की अनुभूति को शून्य किया जाय और इस स्व के शून्य होने पर संकल्प शून्य होगा फलत: सन्यास उदय होगा । 

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