भगवद्गीता
के अज्ञात ग्रंथकार ने गुरू द्वारा बताये गये सन्यास के सम्बंध में दिये गये उपदेश को व्यक्त
करने के लिये सर्वसंकल्पसन्यासी शब्द का प्रयोग किया है । इच्छाओं का जन्म होता है
मानसिक संकल्प से । इसलिये जिस व्यक्ति के इंद्रीय वासना वस्तुओं के मोंह के अधीन आने वाले विषयों के प्रति
मानसिक संकल्प शून्य हो जावेंगे परिणामत: वह व्यक्ति इच्छा शून्य हो जावेगा । ऐसे व्यक्ति
को सर्वसंकल्पसन्यासी कहा जावेगा । इच्छाशून्य होना है तो उसे संकल्पशून्य होना होगा
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