सोमवार, 12 अक्टूबर 2015

योग साधना विधि : चरण 1 की व्याख्या

गुरू ने योग की अवस्था पाने के लिये प्रथम अनिवार्य दशा के रूप में सम्पूर्ण इच्छाओं का परित्याग बताया । वह इच्छायें जो इंद्रीय वासनाओं की पूर्ति के निमित्त पैदा हुई हैं अथवा प्रकृतीय गुणों के सम्मोहन द्वारा जागृत हुई हैं । इनके रहते मस्तिष्क ब्रम्ह की ओर अग्रसर हो ही नहीं सकता है । दूसरी अनिवार्य दशा गुरू ने  समस्त इंद्रियों को मस्तिष्क के नियंत्रण में रखने की बतायी है । इससे साधना अवधि में नये विकार का जन्म सम्भव नहीं होगा । 

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