गुरुवार, 8 अक्टूबर 2015

स्थायी उत्कर्ष की व्याख्या

गुरू द्वारा बताये गये आत्म अनुभव के मिलने पर व्यक्ति ब्रम्ह के साथ एकीकृत महसूस करने लगता है । यह इस संसार का महानतम् अनुभव है । मोंह के अधीन अनुभव होने वाला सुख अथवा दु:ख दोनो ही क्षणिक होते हैं, परिवर्तनशील होते हैं । ब्रम्ह के संसर्ग का सुख चिर होता है । इस अनुभव के समान कोई दूसरा अनुभव सम्भव नहीं है । 

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