भगवद्गीता
मंगलवार, 27 अक्टूबर 2015
समता
गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण कहे कि हे अर्जुन जो व्यक्ति सभी को एक समता के भाव से देखता है
,
सभी में ब्रम्ह के विद्यमान होने की अनुभूति करता है
,
चाहे वह सुख में हो अथवा दु:ख में हो एक समान ही रहता है वह व्यक्ति योगी होता है ।
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