गुरुवार, 1 अक्टूबर 2015

अ-विचलित

पूर्ण योगी की स्थिति को और आगे बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को कहे कि जिस प्रकार वायु संचरण से मुक्त स्थान पर दीपक की ज्योति बिना कम्पन के निर्विघ्न एक लौ स्थापित किये जलती है उसी प्रकार योगी का मस्तिष्क सतत् ब्रम्ह के ध्यान से युक्त अविचलित रहता है ।  

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें