प्रकृति असंख्य सम्भावनाये प्रस्तुत करती है । आत्मा का सम्बंध
उन सम्भावनाओं से नहीं होना चाहिये । परंतु प्रकृतीय मोंह से ग्रसित आत्मा उन
सम्भावनाओं में से चयन करने में संलग्न हो जाती है । इस त्रुटि के कारण ही समस्त
तनाव की स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं । इसी त्रुटिपूर्ण स्थिति का अर्जुन सामना कर
रहा था ।
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