भगवद्गीता
सोमवार, 19 अक्टूबर 2015
योग का फल
योग साधना की चर्मोत्कर्ष उपलब्धि बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण कहे कि साधक व्यक्ति सतत् ब्रम्ह के साथ युक्त रहते हुये यह फल पायेगा कि उसे ब्रम्ह की चिर शांति उसकी अपनी अनुभूति बन जावेगी ।
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