गुरू ने अभी तक के उपदेश में जिज्ञासु अर्जुन को बताये गये योग
के अभ्यास का विस्तार,
योग की स्थिति प्राप्त
होने पर मिलने वाली शांति, योग की शक्ति से दु:खों का अंत
पर्यंत समस्त विस्तार बताये हैं । इन उपदेशो को स6कलित करते हुये अनुभवी
व्याख्याकार कहता है कि व्यक्ति को बिना मस्तिष्क में किसी प्रकार का अन्यथा विचार
लाये अपनी सम्पूर्ण शक्ति का निवेश कर योग का अभ्यास करना चाहिये । योगावस्था
प्राप्त होना निष्चय ही इस संसार की सर्वोच्च उपलब्धि होती है।
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