योग की अवस्था प्राप्त व्यक्ति के लिये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण
बतये कि जो व्यक्ति ब्रम्हके साथ युति की दशा प्राप्त कर लिया है वह व्यक्ति संसार
के समस्त रूपों में ब्रम्हको विद्यमान देखते हुये ब्रम्ह में ही जीवन यापन करता है
भले ही वह किसी कर्म में रत हो ।
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