मंगलवार, 6 अक्टूबर 2015

उत्कर्ष फल की व्याख्या

इंद्रीय ज्ञान अथवा मानसिक विश्लेषण द्वारा जो अनुभव व्यक्ति ग्रहण करता है की तुलना यदि उस अनुभव से की जाय जिसे कंचिद व्यक्ति के मस्तिष्क को समस्त ज्ञात लोक से अलग कर दिया जाय और वह मस्तिष्क केंद्रित प्रयत्नों से यह अनुभूति ग्रहण करे कि हमारे शरीर में संचरित हो रही समस्त गति विधियों को उर्जा कहाँ से प्राप्त हो रही है तो यह निष्कर्श निकलेगा कि पूर्व में वर्णित अनुभव परिवर्तनशील हैं जबकि उत्तरार्ध में वर्णित अनुभव नित्य है । सही और उचित का निर्णय जब हमारे नित्य/सत्य अनुभव पर आधारित होगा तो हम परम् सत्य के साथ एकीकृत अनुभव करेंगे 

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