शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2015

सर्वव्यापी

योग की स्थिति प्राप्त हो जाने पर उसके स्थायी लाभ को बताते हुये गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण कहे कि जिस व्यक्ति को रूप संसार के प्रत्येक रूप में ब्रम्ह का दर्शन मिलने लगता है और समस्त रूप संसार ब्रम्ह में प्रतीत होने लगता है वह प्रतिपल ब्रम्ह के संसर्ग मे रहता है वह न ही ब्रम्ह से विछुडता है और न ही ब्रम्ह उससे बिछुडता है । 

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