ब्रम्ह के साथ एकीकृत होने के अनुभव के स्थायी स्वरूप को बताने
के उपरांत गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि इस युति को योग जानिये
और यह इस योग की महिमा है कि आप दु:खों से मुक्ति पा जाते हैं । इसलिये इस योग का, बिना मस्तिष्क में किसी अन्य विचार के लाये हुये, निश्चय पूर्वक दृढ -अभ्यास करिये ।
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