गुरू ने योग साधना विधि के चरण 1 में बताया कि समस्त इच्छाओं का
परित्याग किया जाय तथा इंद्रियों को पूर्ण नियंत्रण में रखा जाय । अब उस चरण 1 की
स्थिति की सतत् समीक्षा की बात गुरू ने चरण 3 में कही है । निमित्त का निर्धारण करते
हुये व्याख्याकार कहता है कि एक समय स्थल पर प्रयास पूर्वक इच्छा का त्याग किया
व्यक्ति ने परंतु समयांतर से नयी इच्छा के जन्म को सम्भव पाते हुये गुरू ने सतत् समीक्षा
के लिये कहा है ।
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