गुरू द्वारा योग का विस्तार सुन कर अर्जुन कहा कि हे मधुसूदन
आपने बताया कि योग की स्थिति के लिये मस्तिष्क की समता की स्थिति होनी चाहिये
परंतु मैं अपने मस्तिष्क में व्याप्त व्यग्रता के कारण ऐसा महसूस करता हूँ कि समता
की स्थिति पाने के लिये मेरे पास कोई स्थिर आधार नहीं है
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें