गुरू ने योग साधना विधि के चरण 1 में इच्छाओं का त्याग और
इंद्रियों का नियंत्रण बताया । चरण 2 में बताया कि चरण के सफलता पूर्वक क्रियांवन
पर फल के रूप में शांति की अनुभूति मिलेगी । चरण 3 में चरण 1 के प्रयत्नों की सतत्
समीक्षा के लिये बताया । अब चरण 4 में कहा कि आनंद की अनुभूति चरण 1 की सही
क्रियांवन पर आश्रित होता है ।
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