गुरुवार, 5 नवंबर 2015

भविष्य का भय : चरण 1

अर्जुन अपने मस्तिष्क में व्याप्त भविष्य के प्रति भय को व्यक्त करते हुये कहता है हे कृष्ण जो व्यक्ति अपने को योग की वाँक्षनाओं के अनुरूप नियंत्रित नहीं कर पाता है यद्यपि कि उसे आस्था है, जिसका मस्तिष्क योग की वाँक्षना के अनुरूप केंद्रित ध्यान की स्थिति नहीं प्राप्त कर पाता है तो ऐसा व्यक्ति किस गति को प्राप्त होता है । 

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